हम ब्रह्मांड में अकेले नहीं हैं: कुरान और विज्ञान के अनसुलझे रहस्य अक्सर जब हम रात के अंधेरे में आसमान की ओर देखते हैं, तो हमारे मन में एक ही सवाल उठता है— "क्या इस विशाल ब्रह्मांड में हम अकेले हैं?" आधुनिक विज्ञान आज भी मंगल और अन्य ग्रहों पर जीवन के संकेत ढूंढ रहा है, लेकिन अगर हम प्राचीन ग्रंथों, विशेषकर कुरान की आयतों को आधुनिक 'एस्ट्रोफिजिक्स' (Astrophysics) की नजर से देखें, तो एक चौंकाने वाली हकीकत सामने आती है। हम ब्रह्मांड में अकेले नहीं हैं, और न ही हम केवल इस पृथ्वी तक सीमित हैं। image credit gemini ai 1. अल-मआरिज: आसमान के अदृश्य हाईवे विज्ञान जिसे आज वर्महोल (Wormhole) या पोर्टल कहता है, कुरान उसे ' अल-मआरिज' (الْمَعَارِجِ) कहता है— यानी ऊपर चढ़ने के रास्ते। ये कोई काल्पनिक रास्ते नहीं, बल्कि अंतरिक्ष-समय (Space-time) में बने वे 'टनल' हैं जिनका उपयोग करके ब्रह्मांड की अरबों प्रकाश वर्ष की दूरियों को पलक झपकते ही तय किया जा सकता है। 2. पाँच ग्रहों की रहस्यमयी यात्रा सूरह अल-कहफ और अन्य आयतों के गहरे विश्लेषण से पता चलता है कि इंसा...
मुसलमान शिक्षा और प्रगति में पीछे क्यूं ? आज से तक़रीबन एक हज़ार साल पहले 1100 ईसवी में दीन-ए-इस्लाम साइंस (विज्ञान) के गोल्डन दौर से गुज़र रहा था। ये वो दौर था जब बग़दाद साइंस और न्यू टेक्नोलॉजी का हेडक्वार्टर हुआ करता था। दुनिया भर के विद्यार्थी साइंस की आधुनिक पढ़ाई के लिए वे बगदाद जाते थे। उस दौर में यूरोप प्रशिक्षण के मामले से अंधकार में डूबा हुआ था। साइंस मुसलमान की पहचान माना जाता था।. मुसलमानों को फतवो ने किया बर्बाद इतिहास में दफ़्न वो दो विशेष फ़तवे जिनकी वजह से आज मुसलमान शिक्षा और प्रगति में पीछे रह गए हैं। यह वह दौर था जब दुनियावी पढ़ाई का हर पहलू फल-फूल रहा था Algebra, Algorithm, Agriculture, Medicine, Navigation, Astronomy, Physics, Cosmology, Psychology वग़ैरा वग़ैरा में मुसलमान एक पहचान माना जाता था। फिर ये हुआ कि ये सब अचानक रुक गया। विज्ञान, दर्शन, निर्माण और अक्लमंदी का ये दौर मुसलमानों के बीच से अचानक ग़ायब होने लगा। वजह बना एक फ़तवा जो अपने वक़्त के इस्लामिक विद्वान कहे जाने वाले इमाम अल ग़ज़ाली (सन 1058-1111) ने अपनी मश...